- Written by Jitendra Singh Rajput
शीत ऋतु को बलवृद्धि कारक ऋतु कहा जाता है l इस ऋतु में उचित आहार और व्यायाम से मानव उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता है l शीत ऋतु में सूर्योदय से पूर्व उठकर टहलना, दौड़ना, साइकिल चलाना श्रेष्ठकर है l सुबह की शुद्ध वायु फेफड़ों के लिए वरदान साबित होती है l प्राणायाम करने से जहां फेफड़ों की अशुद्धि दूर होती है वही फेफड़ों की स्पंदन शक्ति तेज होती है l स्नान से पहले सरसों के तेल से मालिश पूरे शरीर में करें बाद में शीतल ताजे जल से स्नान करें l स्नान के बाद पूरे शरीर को तौलिए से रगड़ कर साफ करने से जहां रक्त संचार सुचारू रूप से बहता है वही शरीर भी कांति पूर्ण हो जाता है l सुबह सुबह टहलना सबसे अच्छा व्यायाम है जिनकी प्रकृति शीत प्रधान है उन्हें उचित गर्म कपड़े पहन कर ही बाहर निकलना l चाहिए शीत ऋतु में जठराग्नि प्रदीप्त होती है जिससे किया गया भोजन आसानी से पच जाता है l कहते हैं इन 4 महीनों में की गई शरीर की देखभाल उसे वर्ष भर स्वस्थ रखती है l अपने बलाबल और पाचन शक्ति की सामर्थ्य अनुसार आहार लेना चाहिए, दूध,घी,मलाई, उड़द की दाल या उससे बने लड्डू, मूंग के लड्डू, गाजर का हलवा, फूलगोभी, मेथी, पालक मूली आदि का सेवन शरीर को शक्ति प्रदान करता है l शीत ऋतु में दिन में कदापि नहीं सोना चाहिए इससे शरीर में कफ बनता है l जो बीमार होने का कारण बन सकता है l रात्रि में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम माना जाता है l शीत ऋतु में ही बाजी कारक औषधियों का सेवन किया जाना चाहिएl जिससे शरीर शक्ति पूर्ण होता है और बल वीर्य की वृद्धि होती है l कफ की अधिकता मैं रात्रि को सोते समय एक गिलास जल में अदरक को उबालकर थोड़ी सी हल्दी और सेंधा नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है l भोजन में ज्यादा गरिष्ठ मसालेदार बासी चीजें सम्मिलित नहीं करना चाहिए l आंवला या उसके चूर्ण का सेवन अधिक फायदेमंद होता है l सूखे मेवे खजूर आदि का सेवन भी बल वृद्धि प्रदान करता है शक्ति और रक्त बढ़ाने के लिए रात्रि को पानी में में भिगोई गई 10किशमिश को सुबह दूध मैं 4-5 खजूर डालकर उबालें और थोड़ा- थोड़ा पिएं इससे प्राप्त होने वाले परिणाम आशाजनक होते हैं l बल वृद्धि के लिए सुबह सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाकर खाएं और ऊपर से मिश्री मिला दूध का सेवन करें इससे शरीर को लाभ होता है l सफेद मूसली को पीसकर पाउडर बना ले एक चम्मच सुबह एक चम्मच शाम दूध से सेवन करें शरीर में ताकत आती है l यह सभी योग अपनी पाचन शक्ति की सामर्थ्य के अनुसार प्रयोग करें l इनके प्रयोग करते समय उचित व्यायाम, टहलना, दौड़ना जो भी संभव हो किया जाना चाहिए l जिससे यह आसानी से पच सके l कोई भी योग प्रारंभ करने से पहले कोष्ठ शुद्धि अर्थात पेट साफ अवश्य करें l जितेंद्र सिंह राजपूत होशंगाबाद |
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Written by Jitendra Singh Rajput
District: Hoshangabad
State: Madhya Pradesh