नसरुल्लागंज---- जहां एक और मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा एवं सरकार मे भागीदारी के लिए अनेकों योजनाएं प्रारंभ की है वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर महिलाओं से प्रसव (डिलेबरी) के लिये भी तैनात कर्मचारियों द्वारा पहले फीस तय की जाती है रिश्वत में फीस ना देने की स्थिति में संबंधित मरीज को अस्पताल परिसर से बाहर निकाल दिया जाता है फिर चाहे मरीज स्वयं मर जाए अथवा उसका पैदा होने वाला बच्चा मर जाए अस्पताल कर्मचारियों को इसकी कोई चिंता नहीं रहती ऐसे मामले नसरुल्लागंज अस्पताल में आए दिन होते रहते हैं ऐसा नहीं है कि विकास खंड चिकित्सा अधिकारी को ऐसे मामलों की जानकारी नहीं है परन्तु या तो वह भी पैसों की बंदरबांट में शामिल है या अस्पताल की व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है इसी प्रकार का एक मामला विगत30नबंबर को नसरुल्लागंज अस्पताल में हुआ है जानकारी अनुसार बजरंग कुटी नसरुल्लागंज निवासी नीलेश धुर्वे ने अपनी पत्नी को 29 तारीख की रात्रि करीब 9:00 बजे स्थानीय अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था भर्ती कराने के बाद ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने प्रसव कराने के लिए ₹5000 की मांग की, क्योंकि नीलेश धुर्वे आदिवासी मजदूर होने से ₹5000 नहीं दे पाया उसने स्टाफ सहित अधिकारियों से अनुनय-विनय किया परंतु दर्द से कराहती हुई पत्नी को अस्पताल के कर्मचारियों ने अस्पताल से बाहर कर दिया जब राहुल धुर्वे ने नगर पंचायत उपाध्यक्ष राजेश पंवार से मदद चाही तो उन्होंने विकास खंड चिकित्सा अधिकारी से दूरभाष पर करीब तीन चार बार निवेदन किया किंतु उनके निवेदन का कोई असर नहीं हुआ रात भर से परेशान राहुल धुर्वे अंततः होशंगाबाद अस्पताल गया जहां उसकी पत्नी को डिलीवरी तो सामान्य रूप से हुई किंतु पिछले 12 घंटों उसकी पत्नी को समुचित इलाज ना मिलने के कारण उसे बच्चे से हाथ धोना पड़ा। घटना की संपूर्ण जानकारी मय शपथ पत्र के राहुल धुर्वे ने वरिष्ठ अधिकारियों को दी है किंतु आज तक कहीं से कोई कार्यवाही नहीं हुई है इस प्रकार की घटनाओं से मुख्यमंत्री जी का ग्रह क्षेत्र होने से निश्चित:उनकी छवि पर असर हो रहा है स्थानीय भाजपा के नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि इस प्रकार के भ्रष्ट कर्मचारियों को तत्काल रुप से नसरुल्लागंज स्वास्थ्य केंद्र से हटवाए एवं स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं किसी ऐसे अधिकारी को सौंपें जिससे कि आमजन को राहत मिल सके।