मध्य प्रदेश के शहडोल संसदीय क्षेत्र में राजनीतिक धुरंधरों की माने तो 19 नवंबर को होने वाले लोकसभा उपचुनाव में कांटे की टक्कर होनी है। दरअसल शहडोल संसदीय सीट से सांसद रहे दलपत सिंह की असमायिक मृत्यु के बाद यह सीट खाली हो गई थी जिस पर सोमवार को निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन तिथि की घोषणा कर संसदीय क्षेत्र में आचार संहिता लगा दी है। प्रमुख राजनीतिक दलों ने अब तक अपने प्रतयाशियों का चुनाव नहीं किया है और न ही अधिकारिक रूप से घोषणा ही की है। बावजूद इसके संसदीय क्षेत्र में शामिल 8 विधानसभाओं में उपचुनाव को लेकर जमकर गहमा गहमी है। गौरतलब है कि शहडोल संसदीय क्षेत्र में 4 जिले के 8 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं जहां उप चुनाव में शामिल प्रत्याशियों को पहुंंचना है और अपनी बातें मतदाताओं को समझानी है। उपचुनाव में दो राष्ट्रीय दल कांग्रेस एवं भााजपा के अलावा भी समाजवादी पार्टी,बहुजन समाज पार्टी सहित गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, जनता पार्टी, बहुजन मुक्ति पार्टी के अलावा भी कई अन्य पार्टियों के शामिल होने के कयास लगाये जा रहे हैं। निश्चित ही निर्वाचन प्रक्रिया में प्रत्याशियों की अधिक तादात कांटे की टक्कर साबित होगी। गौरतलब है कि शहडोल लोकसभा के वर्ष 2014 के निर्वाचन में अलग अलग पार्टियों से कुल 14 प्रत्याशी मैदान में थे।
8 विधानसभाओं में होंगे मतदान
8 विधानसभा क्षेत्र में फैला शहडोल संसदीय क्षेत्र निश्चित ही बड़ा क्षेत्र माना जाता है। क्षेत्र के अंतर्गत 4 जिलों शहडोल, कटनी, उमरिया, और अनूपपुर के 8 विधान सभा शामिल हैं। जिसमें मुख्य रूप से शहडोल जिले के जयसिंहनगर-84 (अजजा), जैतपुर-85 (अजजा), अनूपपुर जिले के कोतमा-86 (सामान्य), अनूपपुर-87 (अजजा), पुष्पुराजगढ़-88 (अजजा), वहीं उमरिया जिले के बांधवगढ़-89 (अजजा), एवं मानपुर -90 (अजजा) तथा कटनी जिले का बड़वारा-91 (अजजा) शामिल है। वर्ष 2014 के लोकसभा निर्वाचन में शहडोल संसदीय क्षेत्र 12 (अजजा) से भाजपा विजयी हुई थी जिसमें स्व. दलपत सिंह परस्ते ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी स्व. राजेश नंदनी सिंह से 2 लाख 41 हजार 301 मत से जीत हासिल की थी। दुर्भाग्य से वर्ष 2014 के दोनों प्रमुख प्रतिद्वंदी की असमायिक मृत्यु हो गई है। देखना होगा निर्वाचन उपरांत जीत का सेहरा किसके सर होगा।
राजनीतिक गलियारों में प्रत्याशियों को लेकर गहमा गहमी