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उमरिया। घुनघुटी वन परिक्षेत्र अंतर्गत कई गावों में बाघ की मूवमेंट से स्थानीय लोग खासा परेशान हैं। ग्रामीणों की मानें तो क्षेत्र में करीब 5 बाघ सक्रिय हैं जिनके मूवमेंट की खबर वन अमले को भी है। अभी हाल के महज दो माह में ही टाईगर किलींग से कई मवेशियों के साथ साथ दो चरवाहों की मौत हुई है,वहीं 7 अन्य लोग टाईगर के हमले से गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। क्षेत्र में और ऐसी घटनाएं न हो इसको लेकर पार्क प्रबंधन सहित सामान्य वन अमला चिन्हित क्षेत्रों मे एहतियात बरत रहे हैं। 
बीते दो वर्षो में बाघ के हमले से विभिन्न क्षेत्रों में अलग अलग 16 इंसानों की मौत हो चुकी है वहीं बाघ के हमले से कई घायल भी हुए हैं। बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व क्षेत्र में जहां 9 लोग बाघ के हमले से काल के गाल में समा चुके हैं वहीं क्षेत्रीय वन मंडल अंतर्गत घुनघुटी एवं पाली में 7 लोग बाघ के हमले से जख्मी हो मौत के आगोश में समा चुके हैं। टाईगर किलिंग के मामले में जिन लोगों को बाघ अपना निवाला बनाया है,उनमें से अधिकांश चरवाहे बताए जाते हैं, दरअसल वन क्षेत्र में चारागाह को देखते स्थानीय चरवाहे अपने पालतु मवेशियों को जंगल ले जाते हैं, इस दौरान जंगल में मौजूद बाघ मवेशियों के साथ चरवाहों को देख उसे दुश्मन समझ बैठता है और हमला कर देता है। वन विशेषज्ञों की माने तो बाघ के हमले में हुई अधिकांश इंसानी मौतों की मुख्य वजह यही है। मौत के बहुत कम ही ऐसे मामले है जिनमें बाघ वन क्षेत्र से बाहर आकर रिहायशी क्षेत्र में हमला कर इंसान को किल किया हो।

बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के कोर एवं बफर जोन मिलाकर 9 वन परिक्षेत्र हैं जो करीब 1536 वर्ग किमी के विशालकाय क्षेत्र में फैला हुवा है। पार्क का क्षेत्र भले ही क्षेत्रीय दष्टि से आनुपातिक रूप से प्रबंधन को ठीक लग रहा हो परंतु बाघों की साल दर साल बढ रह़ी जनसंख्या को देखते क्षेत्र अपेक्षाक्रत अब कम है। वन विशेषज्ञों की मानें तो अभी हाल में पार्क क्षेत्र में सैकड़े से अधिक बाघ मौजूद हैं। बाघों की संख्या बढऩे से अब बाघ क्षेत्र से बाहर निकलकर भी विचरण कर रहे हैं। वन अमला ऐसे चिन्हित बाघों को जो क्षेत्र में आदमखोर की भूमिका अदा करते हैं और क्षेत्र से बाहर निकलकर मवेशियों सहित इंसानों को हमला कर किल करते हैं उन्हे चिन्हित कर रिहायशी क्षेत्र से दूर अन्यत्र सुरक्षित बाड़े में रखा जाता है। निगरानी के दौरान ऐसे बाघों को चिन्हित करने बकायदा टैब कैमरे से बाघ के मूवमेंट की रेग्यूलर मॉनीटरिंग की जाती है तब जाकर प्रबंधन यह तय कर पाता है कि बाघ आदमखोर है या नहीं।

बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में वर्ष 1975 से 6कोर जोन थे जो करीब 716 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुवा था परंतु संरक्षित वन क्षेत्र में वन्य प्राणियों की लगातार बढ़ रही तादात को देखते क्षेत्र की सीमा और बढाई गई जिसमें वन परिक्षेत्र धमोखर ,पनपथा एवं मानपुर के करीब 803 वर्ग किमी वनक्षेत्र को पार्क में सम्मिलीत कर बफर जोन बनाया गया,अभी वर्तमान में पार्क क्षेत्र लगभग 1536 वर्ग किमी के विशालकाय क्षेत्र में फैला हुवा है। टाईगर रिजर्व में 6 कोर जोन कोर जोन अंतर्गत मगधी, खितौली, ताला, कल्लवाह, पतौर, पनपथा, धमोखर रेंज हैं वहीं बफर जोन में धमोखर, पनपथा, एवं मानपुर को वर्ष 2013-14 में शामिल किया गया है। जानकारों का मानना है कि बीटीआर क्षेत्र में बाघ की जनसंख्या के मुताबिक क्षेत्र अपेक्षाकृत क म है जिस वजह से बाघ फ्री होकर रिहायशी क्षेत्रों में जाकर मवेशियों के साथ-साथ इंसानों पर भी हमला करने में गुरेज नहीं कर रहा है।