सिद्धू की पहले भी आप से बात हुई थी लेकिन दोनों के बीच बात नहीं बन पायी. अभी उनकी कांग्रेस से बात चल रही है और कैप्टन अमरिंदर ने कहा है कि अगले दो दिन में सिद्धू के साथ समझौते की तस्वीर साफ हो जाएगी. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धू और कांग्रेस के बीच पेंच फंसा हुआ है. सिद्धू चाहते हैं कि मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव नतीजे के बाद हो लेकिन कांग्रेस उनकी इस मांग को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. बैंस ब्रदर्स का जाना क्यों है सिद्धू के लिए झटका बैंस ब्रदर्स सिद्धू के फ्रंट की आर्थिक ताकत माने जाते थे. दोनों भाईयों ने साइकिल पार्ट्स से कारोबार की शुरुआत की और बाद में पूरे पंजाब में प्रॉपर्टी का कारोबार फैलाया. लुधियाना में तो इन दोनों ने आम आदमी की दिक्कतों को दूर करने लिए सुविधा सेंटर खोल रखा है जहां पर बिजली-पानी के भुगतान से लेकर दूसरे कामों में लोगों की मदद की जाती है. पिछले चुनाव में दोनों भाई लुधियाना जिले से ही निर्दलीय विधायक चुने गये थे. बैंस ब्रदर्स साल 2012 से पहले अकाली दल के समर्थक माने जाते थे लेकिन जब पिछले चुनाव में अकाली दल ने एक ही भाई को टिकट दिया तो इनके रिश्तों में दरार आ गई. तब से दोनों भाईयों ने कई मौकों पर बादल परिवार के खिलाफ मोर्चा खोला. बादलों को कैसे आउट करेंगे गुरू! बैंस भाईयों की तरह गुरु भी पंजाब को बादल परिवार से मुक्त कराने का दम भर रहे हैं लेकिन करेंगे कैसे? ना तो केजरीवाल ने उन्हें झाड़ू थमाया ना ही कैप्टन ने अबतक उनसे हाथ मिलाया. रही सही कसर बैंस ब्रदर्स ने उनको बीच मंझधार में छोड़कर पूरी कर दी.